Krishi Desh

For Bharat and Bharati

यल्गार

Posted by संदीप नारायण शेळके on July 26, 2011


मराठी मधे यल्गार

आज, लगभग, हर युवक-युवती नौकरी, शादी और अपना घर चाहते हैं। जो अपने माता-पिता को बोज मानकर स्वतंत्र आवास की तैयारी करते हैं ऐसे युवा किस काम के? ऐसे युवक-युवतियोंसे भला कोई क्या अपेक्षा रखेगा?

और जब देश की आनेवाली पीढ़ी ही इतनी गैरजिम्मेदार, आत्मकेंद्रि हो तो आशा की नज़रों से किसकी और देखें, किसके नाम की दुहाई दे, किसको मदत के लिए पुकारें? हमें इस कगार पर लानेवाली गत पीढियोंसे? जिन्हें अपने खाने-पिने का सवाल इतना महत्त्वपूर्ण लग रहा था की सही-गलत, नैतिक-अनैकित इन सब की ओर ध्यान देने का समय ही नहीं मिल पाया। जो स्वातंत्र्य के बाद राष्ट्र निर्माण के लिए दिशा नहीं दे पाए।

चारो ओर यही शोकांतिका हैं। किसी किसान से अपनी बेटी का ब्याह करने से बेहतर उसे कुए में धकलेना हैं ऐसा जब कोई किसानही सोचता हैं तो बेहद पीड़ा होता हैं।

हमारी समस्याएं:

१. बेकार और प्रभावहीन शिक्षण व्यवस्था।

२. गैरजिम्मेदार आदर्शहीन पालक।

३. कर्महीन गुरुजन।

४. दिशाहीन युवक-युवती।

५. पैसा अपना सर्वस्व माननेवाला (तेजीसे बढ़ता हुआ) समाजवर्ग।

६. अकार्यक्षम, गुंडागर्दी करनेवाले, मक्कार, देशद्रोही राजकीय नेता मंडली।

७. भ्रष्ट, भोगविलासी एवं कामचोर पुलिस और बाबु लोग।

८. घटता श्रममूल्य क्योंकि पैसा कम तो हैसियत कम।

९. परदेशियोंके और देश विघताकी लोगों के हात की कटपुतली बने हुने पत्रकार, वर्तमानपत्र एवं प्रसार माध्यम।

और अपना समाज, सबसे बड़ी समस्या।

जैसेही आप कुछ कार्यारंभ करें समाज में आपकी खिचायीं आरंभ होती हैं। आज कोई भी अपने आप को महाराणा प्रताप, जिजाबाई, छ. शिवाजी महाराज, ताराबाई, महात्मा फुले, रानी लक्ष्मीबाई, स्वामी विवेकानंद, भगतसिंह, राजगुरू, चापेकर आदि राष्ट्रवीर तथा प्रतिभाशाली व्यक्तिओं के आदर्शानुसार देश के लिए समर्पित करने या चर्चा करने को भी तैयार नहीं हैं। आज आधे से ज्यादा भारतभूमि नक्सलियों, आतंकवादियों की आतंक से दहेक रही हैं। पूरा भारतवर्ष नेतओं के, बाबुओं एवं पुलिसवालों द्वारा चलाये गए, अत्याचारों से जर्जर हो उठा हैं।

भारत माँ – जिसने हमें पहचान दी – आज मदत की गुहार लगा रही हैं और हम मजे से दिवाली-होली मना रहे हैं।

“लोकशासन नाम के लिए और सत्ता नेताओं के काम के लिए”

अब और बर्दाश्त नहीं करना चाहिए, इन सब देशद्रोहियों तथा भ्रष्ट नेतओं के विरुद्ध यल्गार करना जरुरी हैं

जय भारत!

जो वतन के कम न आये खाक वह जवानी हैं।

About these ads

3 Responses to “यल्गार”

  1. [...] Comments यल्गार « ॥ कृष… on यल्गारसंदीप नारायण शेळके on Bharat needs a leader [...]

  2. [...] लेख: यल्गार और सत्ताकारणी – एक शंड आणि [...]

  3. [...] – एक शंड आणि …Corruption loot amou… on यल्गारसंदीप नारायण शेळके on Goa Inquisition – [...]

What do you think?

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 472 other followers

%d bloggers like this: